अजमेर सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 801वें उर्स के बड़े कुल के छींटे रविवार देर रात को ही शुरू कर दिए। बड़े कुल की रस्म सोमवार सुबह अदा की जाएगी। मगरिब की नमाज के बाद हिजरी संवत के रजब महीने की 9 तारीख लग जाने के कारण अनेक जायरीन ने रात में ही दरगाह के दरो दीवार को गुलाब जल व केवड़े से धोना शुरू कर दिया। आस्ताना शरीफ की दीवारों के साथ ही अहाता ए नूर में भी विभिन्न दरवाजों को जायरीन धोते नजर आए। कुछ जायरीन इस पानी को जमीन पर नीचे गिरने से पहले ही वापस बोतलों में भरते नजर आए। वे इसे बतौर तबर्रुक अपने साथ ले गए।
सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 801वें उर्स के बड़े कुल की रस्म अदायगी के साथ ही सोमवार को उर्स का विधिवत रूप से समापन हो जाएगा। इधर दरगाह क्षेत्र में अभी उर्स की रौनक बनी हुई है। जायरीन अलग-अलग समूहों में जुलूस के रूप में चादर पेश करने आ रहे हैं। किन्नरों की ओर से भी चादर व फूल पेश करने का सिलसिला जारी है।
अंजुमन सैयदजादगान के सचिव सैयद वाहिद हुसैन अंगाराशाह के मुताबिक सोमवार को सुबह 8 बजे आस्ताना शरीफ जायरीन के लिए बंद कर दिया जाएगा। आस्ताना शरीफ में खुद्दाम ए ख्वाजा ही मौजूद रहेंगे। खुद्दाम हजरात गरीब नवाज की मजार को केवड़े व गुलाब जल से गुस्ल देंगे। मुल्क की तरक्की और खुशहाली के लिए दुआ की जाएगी। इधर आस्ताना शरीफ के बाहर देश के विभिन्न हिस्सों से आए जायरीन गुलाब जल व केवड़े से परिसर की धुलाई करेंगे। इसके साथ ही उर्स का समापन हो जाएगा।
रविवार को दिन भर जुलूस का सिलसिला जारी रहा। अधिकतर जायरीन फव्वारा सर्किल से मखमल की चादरों को फैला कर जुलूस के रूप में रवाना हुए। आगे अकीदतमंद ढोल ढमाकों के साथ चल रहे थे। ख्वाजा का दामन नहीं छोड़ेंगे और मेरा ख्वाजा हिंद का राजा आदि सदाएं लगाते हुए चल रहे थे। ये जुलूस गंज, देहली गेट और दरगाह बाजार होते हुए दरगाह पहुंचे। आस्ताना शरीफ पहुंच कर इन अकीदतमंद ने मजार पर चादर और फूल पेश कर मन्नत मांगी।
बुनकर तैयार करते हैं चादर
सरफराज अहमद ने बताया कि इस चादर को तैयार करने में लगभग 6 महीने का वक्त लगा और बुनकर ही इसे तैयार करते हैं। चादर लेकर आने वाले लोग पहले दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह से भी मिल कर आए हैं।
कलंदरों ने पेश की चादर : इधर आज सुबह देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलंदर व मलंग भी धूमधाम से चादर पेश करने के लिए दरगाह पहुंचे। जुलूस में शामिल कलंदर व मलंग हैरतअंगेज करतब पेश करते हुए चल रहे थे। कुछ कलंदर हाथों में परचम लिए चल रहे थे। मलंगों के हैरतअंगेज करतब देखने के लिए जायरीन की भीड़ लगी नजर आ रही थी। बाद में यह चादर गरीब नवाज की मजार पर पेश कर मन्नत मांगी गई।
बड़े कुल के छींटे रात से ही शुरू
No comments:
Post a Comment