भास्कर न्यूज त्नअजमेर
सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 801वें उर्स की छठी शरीफ खुद्दाम ए ख्वाजा ने अदा कराई। इस रस्म में खासी तादाद में आशिकान-ए-ख्वाजा शरीक हुए। इस मौके पर अंजुमन सैयदजादगान ने शान-ओ-शौकत के साथ गरीब नवाज की मजार पर मखमल की चादर पेश की। शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे जन्नती दरवाजा जायरीन के लिए बंद कर दिया गया। आस्ताना शरीफ में केवल खादिम ही मौजूद रहे। करीब 8.30 बजे अंजुमन सैयदजादगान की ओर से जुलूस के रूप में चादर अहाता-ए-नूर लाई गई। यहां अंजुमन सदर सैयद हिसामुद्दीन नियाजी की सदारत में महफिल-ए-समां हुई। शाही कव्वाल असरार हुसैन और साथियों ने गरीब नवाज की शान में मनकबत के नजराने पेश किए। अंजुमन सचिव सैयद वाहिद हुसैन अंगाराशाह, सहसचिव सैयद मुशीर हुसैन चिश्ती, सैयद जान मोहम्मद चिश्ती, उपाध्यक्ष सैयद मुशर्रफ चौधरी समेत विभिन्न पदाधिकारी व सदस्य मौजूद थे। खुद्दाम ने बाद में चादर गरीब नवाज की मजार पर पेश की और दुआ की।
छठी शरीफ की रस्म में भावुक हुए अकीदतमंद : अहाता-ए-नूर में ही सुबह करीब 10 बजे छठी शरीफ की रस्म शुरू हुई। खुद्दाम-ए-ख्वाजा ने यह रस्म अदा कराई। शिजराख्वानी और सलातोसलाम के बाद तमाम हाजरीन व देशवासियों के लिए दुआएं की गईं।
एक-दूसरे की दस्तारबंदी और मुबारकबाद : छठी शरीफ की रस्म के बाद जन्नती दरवाजा वापस खोला गया। खुद्दाम हजरत ने गरीब नवाज की मजार पर अकीदत का नजराना पेश कर एक-दूसरे की दस्तारबंदी की। कुछ खुद्दाम ने मौके पर मौजूद पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों की भी दस्तारबंदी की। कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष आरिफ हुसैन की भी दस्तारबंदी की गई।
अंजुमन ने कराई कुरानख्वानी : अंजुमन शेखजादगान ने फज्र की नमाज के बाद कुरानख्वानी कराई। छठी शरीफ की नियाज दिला कर जायरीन को तकसीम किया गया।
खिदमत दोपहर में हुई : शुक्रवार से आस्ताना शरीफ के मामूल बदल गए। दिन में मजार शरीफ की खिदमत हुई। आस्ताना शरीफ शाम को 4 बजे तक बंद रहा। इसके बाद वापस जियरत के लिए खोल दिया गया। रात को कड़के के साथ आस्ताना शरीफ मामूल कर दिया गया।
दागोल की रस्म
दरगाह दीवान आबेदीन के आस्ताना शरीफ में दाखिल होते ही देश के विभिन्न हिस्सों से आए मलंग व कलंदर जुलूस के रूप में अहाता ए नूर व संदल खाना मस्जिद के सामने वाले गेट से होते हुए महफिल खाना पहुंचे। यहां दीवान आबेदीन की गद्दी पर कब्जा किया और मलंग व कलंदरों ने हैरतअंगेज करतब पेश कर दागोल की रस्म अदा की।
दीवान पहुंचे खानकाह
आस्ताना शरीफ में कुल की रस्म संपन्न करके दरगाह दीवान आबेदीन को वापस कड़ी सुरक्षा में बेगमी दालान और संदल खाना मस्जिद के सामने होते हुए खानकाह शरीफ ले जाया गया। जायरीन को रोकने के लिए रास्ते में दोनों ओर रस्से बांधे हुए थे। खानकाह में दरगाह दीवान ने कदीम रस्म के मुताबिक अमला शाहगिर्द पेशां मौरूसी अमले की दस्तारबंदी की।
अंजुमन सैयदजादगान की ओर से चादर पेश करने जाते पदाधिकारी।
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