Monday, 20 May 2013

बड़ा कुल हुआ, 801वां उर्स संपन्न


BP661665-largeभास्कर न्यूज त्न अजमेर


महान सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 801वें उर्स का सोमवार को बड़े कुल के छींटों के साथ समापन हो गया। इसके साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से आए जायरीन वापस लौट गए और दरगाह क्षेत्र में पिछले 15 दिनों से जारी रौनक भी फीकी पड़ गई। सोमवार सुबह 8 बजे आस्ताना शरीफ जायरीन के लिए बंद कर दिया गया। खुद्दामे ख्वाजा ही आस्ताना शरीफ में रहे। खादिमों ने परंपरा के मुताबिक गरीब नवाज की मजार को केवड़े और गुलाब जल से गुस्ल दिया।


मजार शरीफ को संदल पेश की गई। फातिहा के बाद मौजूद जायरीन और देशवासियों के लिए दुआ की गई। इधर आस्ताना शरीफ के बाहर देश भर से आए जायरीन ने केवड़े, गुलाब जल और सादा पानी से दरगाह परिसर व आस्ताना शरीफ के दरो-दीवार की धुलाई की। अनेक अकीदतमंद इस पानी को बतौर तबर्रुक बोतलों में भरने लगे और अपने साथ ले गए। महिलाओं ने भी दरगाह के अहाता ए नूर की फर्श आदि की धुलाई की। कुछ अकीदतमंद ने गाजेबाजे के साथ कुल की रस्म में शिरकत की। अहाता ए नूर, अरकाट का दालान, सेहन बाबा फरीद समेत विभिन्न हिस्सों में जायरीन ही जायरीन नजर आ रहे थे।


नियाज दिलाई, तबर्रुक तकसीम किया


इधर अनेक जायरीन ने इस मौके पर नियाज दिलाई और तबर्रुक तकसीम किया। इस तबर्रुक को पाने के लिए जायरीन में होड़ लगी नजर आई। इधर घरों में भी नियाज दिला कर तबर्रुक तकसीम किया गया। खादिमों ने भी लौटने वाले मेहमानों की दस्तारबंदी की और उन्हें तबर्रुक भेंट कर विदा किया। जायरीन लौटे बड़े कुल की रस्म के समापन के साथ ही सुबह करीब 11 बजे से ही दरगाह बाजार, नला बाजार और आसपास के क्षेत्रों से जायरीन के लौटने का सिलसिला शुरू हो गया। बैग और सूटकेस-थैले उठाए जायरीन के अलग-अलग समूह पैदल ही रेलवे स्टेशन, फव्वारा सर्किल की ओर जाते नजर आए। जिन जायरीन के पास अधिक सामान था वे हाथ ठेलों में सामान लदवा रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड की ओर जाते दिखे। विभिन्न क्षेत्रों से शाम तक जायरीन के लौटने का क्रम देर शाम तक बना हुआ था। दरगाह बाजार में भी रौनक कम हो गई थी।


उर्स के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 23 हजार से अधिक रोगियों का उपचार किया। उर्स के मद्देनजर विभाग ने शहर में 10 अस्थायी डिस्पेंसरी लगाई। जहां रोगियों का निशुल्क उपचार कर दवा दी गई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ लक्ष्मण हरचंदानी ने बताया कि विभाग द्वारा लगाई गई अस्थायी डिस्पेंसरियों में 23 हजार 949 जायरीन रोगियों का उपचार किया गया। 89 रोगियों को रेफर किया गया जिनमें से 45 को जेएलएन अस्पताल में भर्ती किया गया। बुखार के 145, उल्टी-दस्त के 46, उल्टी के 597, दस्त के 733 रोगियों का उपचार कर निशुल्क दवा दी गई।


तारागढ़ स्थित हजरत मीरां सैयद खिंग सवार की दरगाह में मंगलवार को शहजादा अली असगर का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस मौके पर चरागां होगा और महफिल-ए-मीलाद होगी। तारागढ़ दरगाह इंतेजामिया कमेटी के सचिव सैयद सगीर अब्बास के मुताबिक रजब की 10 तारीख को शहजादा अली असगर का जन्मोत्सव का दिन है। अब्बास के मुताबिक अली असगर करबला के सबसे मासूम शहीद हैं, जिनकी शहादत के समय 6 महीने की आयु थी। इस मौके पर अंजुमन गुलशन-ए-जाफरिया की ओर से आयोजन होंगे।



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