अजमेर. सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती का ८०१वां सालाना उर्स शुक्रवार को कुल की रस्म के साथ संपन्न हो गया। कुल जुमे को होने के कारण नमाज भी अदा की गई। जिसमें बड़ी संख्या में जायरीन ने शिरकत की। बड़ा कुल २० मई को होगा। दरगाह बाजार में देशभर से आए जायरीन नमाज अदा करते हुए।
अजमेर। सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 801वें उर्स में शरीक होने आए आशिकान-ए-ख्वाजा ने शुक्रवार को उर्स के दौरान की जुमे की नमाज अदा कर मुल्क की खुशहाली और तरक्की के लिए दुआ की। आसमान से बरसती आग और तपती धरती पर हजारों बंदगाने खुदा ने सजदा-ए-शुक्र अदा किया। नमाज शुरू होने से दो-तीन घंटे पूर्व ही सफें बना कर बैठ गए थे जायरीन-ए-ख्वाजा।
गरीब नवाज के उर्स के कुल की रस्म और जुमा एक दिन ही होने के कारण जुमे की नमाज में अपेक्षाकृत अधिक जायरीन शरीक हुए। झुलसाने वाली गर्मी और पारा लगभग 44 डिग्री होने के बावजूद अकीदतमंद नमाज के लिए दो घंटे तक सड़क पर सफ बना कर बैठे रहे। इधर कुल की रस्म शुरू होने से पहले ही आशिकान-ए-ख्वाजा ने दरगाह की शाहजहांनी मस्जिद में नमाज के लिए जगह घेरना शुरू कर दिया था।
सुबह करीब दस बजे तक शाहजहांनी मस्जिद के सेहन के साथ ही सेहन बाबा फरीद शक्कर गंज, महफिल खाना के सामने वाले दालान, और लंगर खाना के सामने वाले दालान के साथ ही बुलंद दरवाजा व निजाम गेट तक जायरीन की सफ लग चुकी थी। सुबह करीब 12 बजते-बजते दरगाह परिसर में नमाजियों की सफ लग चुकी थीं और दरगाह के बाबुल शरीफ गेट समेत विभिन्न गेटों से जायरीन के अंदर आने पर रोक लगा दी गई।
इसके बाद दरगाह के बाहर दरगाह बाजार, लंगर खाना गली, नला बाजार और आसपास के क्षेत्रों में नमाजी सड़क पर ही सफ बना कर बैठना शुरू हो गए। कुछ ही देर में नमाजियों की सफ धानमंडी और देहली गेट को पार करते हुए गंज की ओर बढ़ गई। दरगाह बाजार में लगी बेरिकेडिंग के दोनों ओर नमाजियों की सफ लगी थीं। इधर नला बाजार में भी आधे बाजार तक नमाजियों की सफ पहुंच गई।
12.45 बजे अजान
दोपहर 12.45 बजे जुमे की अजान हुई। इसके बाद अकीदतमंद सुन्नतें अदा करने लगे। इस वक्त तक दरगाह क्षेत्र में नमाजी ही नमाजी दिखाई दे रहे थे। दोपहर 1.35 बजे खुत्बे के लिए अजान हुई और बड़े पीर साहब की पहाड़ी से तोप का गोला दागा गया। शहर काजी मौलाना तौसिफ अहमद सिद्दीकी ने खुत्बा पढ़ा। तकबीर के बाद शहरकाजी की इमामत में अकीदतमंद ने दो रकअत नमाज फर्ज अदा की। नमाज पूरी होने पर फिर तोप के गोले दागे गए।
छठी की रस्म में शरीक हुए आशिकान-ए-ख्वाजा
सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 801वें उर्स की छठी शरीफ खुद्दाम ए ख्वाजा ने अदा कराई। इस रस्म में खासी तादाद में आशिकान-ए-ख्वाजा शरीक हुए। इस मौके पर अंजुमन सैयदजादगान ने शान-ओ-शौकत के साथ गरीब नवाज की मजार पर मखमल की चादर पेश की। शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे जन्नती दरवाजा जायरीन के लिए बंद कर दिया गया। आस्ताना शरीफ में केवल खादिम ही मौजूद रहे।
करीब 8.30 बजे अंजुमन सैयदजादगान की ओर से जुलूस के रूप में चादर अहाता-ए-नूर लाई गई। यहां अंजुमन सदर सैयद हिसामुद्दीन नियाजी की सदारत में महफिल-ए-समां हुई। शाही कव्वाल असरार हुसैन और साथियों ने गरीब नवाज की शान में मनकबत के नजराने पेश किए। अंजुमन सचिव सैयद वाहिद हुसैन अंगाराशाह, सहसचिव सैयद मुशीर हुसैन चिश्ती, सैयद जान मोहम्मद चिश्ती, उपाध्यक्ष सैयद मुशर्रफ चौधरी समेत विभिन्न पदाधिकारी व सदस्य मौजूद थे। खुद्दाम ने बाद में चादर गरीब नवाज की मजार पर पेश की और दुआ की।
अहाता-ए-नूर में ही सुबह करीब 10 बजे छठी शरीफ की रस्म शुरू हुई। खुद्दाम-ए-ख्वाजा ने यह रस्म अदा कराई। शिजराख्वानी और सलातोसलाम के बाद तमाम हाजरीन व देशवासियों के लिए दुआएं की गईं।
कुल की रस्म के साथ उर्स संपन्न
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