गरीब नवाज के उर्स का कुल की रस्म के साथ समापन हो गया। कुल की रस्म में खासी तादाद में आशिकान ए ख्वाजा ने भाग लिया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलंदर व मलंगों ने दागोल की रस्म अदा की। बड़ा कुल 20 मई को अदा किया जाएगा।
दरगाह स्थित महफिल खाने में सुबह 10 बजे बाद दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन की सदारत में कुल की महफिल की शुरुआत कुरान ख्वानी से हुई। शाही कव्वाल असरार हुसैन ने कुल की महफिल का आगाज किया। दोपहर 11.55 बजे मौरूसी फातेहाख्वां जुबेर अहमद व करीम अली द्वारा संदल और पान के बीड़ों पर फातेहा पढ़ी गई। 12.00 बजते ही शाहजहानी नौबत खाने से शादियाने बजाए जाने लगे और बड़े पीर साहब की पहाड़ी से तोप के गोले दागे जाने लगे।
दरगाह दीवान को महफिल खाना में पारंपरिक रस्म के तहत दरगाह कमेटी की और से मौरूसी अमले के रकाबदार हुसैन खां ने खिलअत पहनाया। महफिल खाने से दीवान आबेदीन अपने परिवार के साथ आस्ताने शरीफ में कुल की रस्म के लिए रवाना हुए। उन्हें कड़े सुरक्षा पहरे में महफिल खाना से सेहन बाबा फरीद होते हुए जन्नती दरवाजा लाया गया।
गरीब नवाज के 801वें उर्स के कुल की रस्म के साथ उर्स का समापन शुक्रवार को हो गया, लेकिन अनौपचारिक रूप से बड़े कुल की रस्म के साथ 20 मई को होगा। दरगाह दीवान ने जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन सहित खादिमों की संस्था अंजुमन के पदाधिकारियों को 801वें उर्स की मुबारकबाद देते ह़ुए उर्स के सफल आयोजन एवं जायरीन के लिए बेहतर इंतजाम और मजहबी रस्मों में सकारात्मक सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
कंलदरों ने दागोल की रस्म अदा की, बड़ा कुल 20 को
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