Friday, 17 May 2013

कभी पानी की थैली बांटता दिखा तो कभी जानमाज


0255_63अजमेर। दरगाह व आसपास के क्षेत्रों में उर्स के दौरान विशेष जायरीन को जो पैसे जायरीन से भेंट में मिले, उनसे उसने अखबार खरीदे और जुमे की नमाज में नमाजियों को बांट दिए। नमाजियों को जानमाज मिला उनके सदके में उसका सजदा कबूल हुआ।


दिल्ली गेट पर दोपहर की तपती गर्मी और बैरिकेटिंग के बीच लकड़ी के पट्टे पर खुद को घिसटते सलीम के चेहरे न शिकन थी और न ही थकावट का कोई चिह्न। जब तक सफें पूरी बिछ न गई, नमाज शुरू न हो गई वह अपने काम में जुटा रहा। उसके जज्बे ने औरों को भी आगे आने पर मजबूर कर दिया। फिर तो कोई पानी के पाउच बांटने में जुट गया तो कोई कुछ और।


जुमे की नमाज में नमाजियों को जानमाज (बिछौना) देने का सिलसिला नमाज शुरू होने से पहले तक अनवरत जारी था। दरगाह बाजार, धानमंडी, दिल्ली गेट, गंज, फव्वारा सर्किल सहित आसपास के क्षेत्रों में ऐसे ही कई नजारे नमाज के दौरान देखने को मिले। दुकानदार, क्षेत्रवासी और दूरदराज से आए कई जायरीन नमाजियों को भरी धूप में बिछौना बांटकर इस नेक काम का हिस्सा बने। जुमे की नमाज से ठीक पहले और समाप्ति के बाद तक पानी पिलाने का सिलसिला थमा नहीं। फिजिकली चैलेंज्ड सलीम कई लोगों के लिए मिसाल बना। वह कभी पानी की थैली बांटता दिखा तो कभी जानमाज।


शेखजादा जुल्फिकार चिश्ती और अन्य ने ख्वाजा गरीब नवाज सूफी मिशन सोसायटी की तत्वावधान में नमाजियों को मिनरल वाटर के पाउच बांटे।


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